इस विश्व अण्डा दिवस पर  यह गम्भीर होने का समय है

इस वर्ष विश्व अण्डा दिवस, शुक्रवार 11अक्टूबर, को पूरे विश्व के लोगों को अण्डों को पकाने और अण्डों के रोलिंग प्रतियोगिताओँ के लाभ का मनोरंजन लेने के साथ साथ, अन्तराष्ट्रीय अण्डा कमिशन (International Egg Commission (IEC),  जो एक ग़ैर-सरकारी संगठन है जो दुनिया भर में अण्डा उद्योग का प्रतिनिधित्व करता है, वह गम्भीर हो रहा है वह दुनिया भर में भूख के बारे में गम्भीर हो रहा है।

IEC UN’s Food and Agriculture Organization (FAO) के साथ काम कर रहा है जिससे दक्षिण अफ़रीका के नौ देशों में सरकारों और अण्डा उत्पादकों को सहायता से जानकारी बाँट सकें और अण्डों के पौषटिक मूल्य के साथ साथ, अण्डा उत्पादन और रोग प्रबंधन की तकनीकी सलाह के बारे में लाभदायक प्रयोगात्मक सलाह और समर्थन मिल सके। इसलिए इस वर्ष विश्व अण्डा दिवस पर, अण्डों की प्रतियोगिताओँ और आयोजनों का मनोरंजन लेने के साथ साथ, पूरी दुनिया में कम पौषटिक लोगों के आहार में अण्डों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में कुछ क्षण लें।

जूलियन मैडले (Julian Madeley), IEC के निदेशक जनरल ने बताया:  “आज दुनिया में यह अनुमान लगाया गया है कि, एक बिलियन लोगों को पूरा खाना नहीँ मिलता है और वह कुपोषित हैं, और यह स्थिति अगले 40 वर्षों में और भी ख़राब होने वाली है, क्योंकि दुनिया भर की जनसंख्या और बढ़ कर 3 बिलियन लोगों की होने वाली है।

“सभी को यह स्वीकार नहीँ है, और पूरे अण्डा उद्योग की ओर से, IEC वह सब कुछ करने के लिए वचनबद्ध है जो हम कर सकते हैँ जिससे भूख को रोका जा सके। इसमें अण्डों की महत्वपूर्ण भूमिका है; साथ ही में ऊँचे पैमाने के प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है, जिसमें ज़रूरी विटामिन और खाद्य पदार्थ होते हैँ जो स्वस्थ ख़ुराक के लिए ज़रूरी है, यह आम आदमी की पहुँच मेँ है और अधिकतर दुनिया में यह खाने का एकदम उपलब्ध स्रोत है। भूख, खाने की असुरक्षा और कुपोषण को हटाने के लिए हम FAO के साथ काम करने के लिए वचनबद्ध हैं।” 

सितम्बर में, इस वर्ष के विश्व अण्डा दिवस के पहले, IEC और FAO ने साथ मिल कर लुसाका, जो कि ज़ाम्बिया की राजधानी है मिल कर एक सैमिनार किया। अंगोला, बोत्सवाना, लेसोथो, मालावी, मोज़ाम्बीक, नामिबिया और ज़िम्बाब्वे के सरकारी प्रतिनिधी, पशुओं के चिकित्सक और अण्डा उत्पादकों के साथ आस्ट्रेलिया, कैनेडा, साऊथ अफ़रीका और यू.ऐस.ए. से  IEC के सदस्य मिले। प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशोँ में आज की चुनौतियों का मुकाबला करने के बारे में बातचीत की, और अण्डे के उत्पादन को बढ़ाने और उनके क्षेत्रों में अन्तत: इसकी खपत को बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी और प्रयोगात्मक सलाह को बाँटा।

IEC और FAO में लुसाका में गोष्ठियों (सैमिनारोँ) इस प्रकार की पहली पहली-कदमी थी; इसकी प्रतिक्रिया काफ़ी सकारात्मक थी, और यह दो संस्थाएँ काफ़ी समर्थन प्राप्त करने की आशा रखतीँ हैँ जिससे दुनिया के दूसरे भागोँ में इसी तरह की गोष्ठियों (सैमिनारोँ) के कार्यक्रमों लाने की योग्यता मिल सके।

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